जब तमन्नाओं में मेरे पंख
लगा
उड़ चला खुली आकाश में,
मन में उमंग और थोडा सा डर
क्या होगा सूरज के तेज
प्रकाश में,
गर लौटता तो इरादा छुट जाता
चलता तो जीवन छुट जाता,
जिन्दगी फसी एक कसमकस में
तेज हुई जलन सूरज के तेज
प्रकाश में,
पीछे लौटना मेरी हसरत नहीं
इसलिए आगे बढ़ा इस आभास
में,
होगी अब मंजिल ज्यादा दूर
नहीं
छुटेगी नहीं साँस सूरज के
तेज प्रकाश में,
जलता रहा फिर भी चलता रहा
आशाओं के नव आकाश में,
मुझे इसका आभाष कहाँ की
मंजिल मेरी थी सूरज के उस मंद
प्रकाश में,
जल गया और फिर मैं रख हुआ
पर अब ये दिल मान गया,
लालच बुरी बला है
ज्यादा पाने से अच्छा तो कुछ पाने में ही भला है,

No comments:
Post a Comment