बिखरे हुए सुरों को समेटकर एक नया साज़ लिख जाऊँगा......
गूंजती रहेगी सदियों तक फिजाओं मैं एक रोज वो आवाज़ लिख जाऊँगा......
लिखता हूँ गीत मुहब्बत के मगर करता हूँ ये वादा...
लहू की हर एक बूंद से एक दिन इन्कलाब लिख जाऊँगा.....
Friday, 30 March 2012
Sachin Tendulkar is The God of Cricket. . What do you think?
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