एक दिन सुरेन्द्र शर्मा जी मन्दिर पूजा को गए।
मन्दिर से जब बाहर आए ,अपने नए जूते गायब पाये ।
जूते गायब देखकर ,सुरेन्द्र जी ने मचाया शोर,
तब एक फूल वाले से पता चला ,
कि जूते ले गया शैल नाम का चोर।
ठाणे में रपट लिखाई, जासूसों को पीछे लगाया,
पर शैल नाम का चोर कहीं पकड़ में न आया।
थक हार कर बेचारे श्रीमान,जा पहुचे सीधे शमसान ,
बोले शैल अब देखूँगा ,तने कोण बचावेगा
छोडूँगा नही एक दिन तो शमशान घाट आवेगा।
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